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ज्योतिष वेदों का नेत्र, महामृत्युंजय मंत्र की महिमा अपार : योगी सहजानंद सरस्वती

दक्षिण की द्वारिका में ज्योतिष गुरु अवार्ड से नवाजे गुए योगी सहजानन्द

एंटिक ट्रुथ | हिसार

भारत के केरल राज्य में प्रसिद्ध भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरुप के मंदिर अर्थात दक्षिण की द्वारिका कहे जाने वाले गुरुवायुर शहर के समीप इको गार्डन रिसोर्ट में एकदिवसीय एस्ट्रोलॉजिकल, स्पिरिचुअल एंड सनातन सभा मीट 2025 विषयक कॉन्फे्रंस आयोजित हुई। इंटरनेशनल वैदिक एस्ट्रोलॉजी फेडरेशन (आईबीएएफ) द्वारा आयोजित इस एकदिवसीय कॉन्फे्रंस में देश के विभिन्न राज्यों से अनेक ज्योतिर्विदों, वास्तुविदों आदि ने शिरकत की। ज्योतिष तांत्रिक वेदी द्वारा प्रायोजित इस कॉन्फे्रंस में ज्योतिषियों को विभिन्न पदवियों के साथ अलंकरण अवार्ड आदि भी प्रदान किए गए। श्रीगणेश वंदना के साथ सामूहिक दीप रोशन से शुरू हुए कार्यक्रम में सभी का स्वागत आईवीएएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर दिव्या पिल्लई हरीश ने किया।
कॉफे्रंस में स्पिरिचुअल गुरु योगी सहजानंद सरस्वती को ज्योतिष गुरु अवार्ड से नवाजा गया। इस अवसर पर उउन्होंने मृत्युंजय मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की अपार महिमा को उल्लेखित किया। उन्होंने कहा कि ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा गया है। आने वाले समस्य में हमें ज्योतिष के क्षेत्र में तेज गति से शोध करने की आवश्यकता है क्योंकि जो जातक चन्द्रमा या मंगल ग्रह पर पैदा हुए, उनका होरोस्कॉप व लॉगीट्यूट लैंडीट्यूट चेंज होंगे तो गणनाएं तेजी से बदलेंगी। चूंकि पृथ्वी भी एक ग्रह है, लेकिन ज्योतिषीय गणना में इसको ग्रह नहीं माना जाता, लेकिन यदि आप चन्द्रमा अथवा मंगल ग्रह पर पैदा हुए हैं तो उस समय पृथ्वी को ग्रह माना जाएगा। उस समय ज्योतिषीय गणनाएं किस आधार पर होंगी यह बड़े शोध का विषय है। वर्तमान परिवेश में कई ज्योतिषी किसी चिप या ऐसे माध्यम से टोटके वगैरह करने लगे हैं, जिस पर भी रोक लगानी आवश्यक हैं, क्योंकि ये सभी प्रक्रियाएं वैदिक और आध्यात्मिक संस्कृति के अनुसार ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक चेतना को आगे बढक़र ही ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही योगी सहजानंदजी ने वेदोक्त, शास्त्रोक्त जीवन यापन में खान-पान व रहन-सहन को दीर्घायु और सहज जीवन के लिए जरूरी बताया। बेहद ही सरलता पूर्वक अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि ज्योतिष के सूत्र समझकर आध्यात्मिक चेतना को जाना जा सकता है। दृष्टा बनने के लिए ज्योतिष को समझना आवश्यक है। योगी ने कहा कि शरीर में आत्मा की भूमिका यंत्र की है और परमात्म शक्ति के मंत्र जाप से उसकी वाइब्रेशन को ऊंचा उठाया जा सकता है तभी नेगेटिविटी मिटेगी व पॉजिटिविटी बढ़ेगी।

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