हिसार

श्रेष्ठ मानव और मानवता का सृजन आज विश्व के सामने एक गंभीर चुनौती है : प्रताप सिंह

जीवन विज्ञान प्रशिक्षण से छात्रों, शिक्षकों तथा कर्मचारियेां में एकाग्रता और, नियमितता बढ़  जाती हैं : राजेंद्र अग्रवाल

एंटिक ट्रुथ | हिसार

जीवन विज्ञान श्रेष्ठ मानव एवं समाज निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी उपक्रम है, श्रेष्ठ मानव और मानवता का सृजन आज विश्व के सामने एक गंभीर चुनौती है। मूल्य आधारित शिक्षा पद्धति के विकास से राष्ट्र का विकास संभव है। जातिवाद, साम्प्रदायवाद व आतंकवाद को समाप्त कर राष्ट्र सुदृढ़ बन सकता है। उक्त वक्तव्य अणुव्रत समिति हिसार द्वारा अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में राष्ट्रव्यापी आचार्य श्री महाप्रज्ञ अलंकार समारोह (जीवन विज्ञान दिवस) राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, मॉडल टाउन हिसार में मुख्य अतिथि प्राचार्य प्रताप सिंह ने कहे।
अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि जीवन विज्ञान प्रशिक्षण से छात्रों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों में एकाग्रता तथा नियमितता बढ़ सकती है। इन प्रयोगों से निश्चित रूप से विद्यार्थियों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक विकास हो सकता है। आज के युवा छात्र कहते हैं कि परीक्षा के दिनों में खूब पढ़ा, पढऩे मात्र से याद नहीं होता, लक्ष्य बनाकर पढ़ेंगे तो याद होगा, सीखना होगा, याद करना होगा, अभ्यास करना होगा। बहुत आवश्यक है पढऩे के साथ सीखने की बात जुड़े। जीवन विज्ञान में शिक्षा में सीखने की बात जुड़ी हुई है। भावनात्मक विकास अथवा चरित्र का विकास केवल शिक्षक और पुस्तक के सहारे नहीं किया जा सकता। उसके लिए जरुरी है रूपांतरण का प्रयोग आसन, प्राणायाम, कायोत्सर्ग, एकाग्रता, संकल्प शक्ति, अनुप्रेक्षा, ये सब रूपांतरण प्रयोग हैं। जीवन विज्ञान में इनके विधिवत अभ्यास से भावनात्मक चरित्र तथा नैतिक मूल्यों का विकास संभव है। विद्यार्थियों में समाज व परिवार के प्रति दायित्व बोध, मानवीय मूल्यों का विकास, नैतिक मूल्यों की वृद्धि तथा चारित्रिक विकास भी अति आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य  व्यक्तित्व का सर्वांगिण विकास होना चाहिए। सर्वांगिण विकास में व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक पक्ष का समान विकास समाहित होता है। छात्र राष्ट्र के भाग्य निर्माता हैं। जीवन विज्ञान पढ़ेंगे तो प्रज्ञा के नेत्र खुलेंगे क्या बनना है पहले यह जानना जरूरी है। एक छात्र का एक सच्चा मानव बनने का ध्येय होना चाहिए।  अगर हम जीवन विज्ञान को पढ़ेंगे तो रचनात्मक दृष्टि खुल सकती है। संवेगों का कंट्रोल, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक संबल बढ़ सकता है। हमारे जीवन को प्रयोगशाला बनाएं, श्रद्धा, आस्था, का जीवन में महत्व है। संयम ही जीवन है। जीवन विज्ञान कहता है निज पर शासन फिर अनुशासन स्वयं पर अनुशासन ही जीवन विज्ञान है। हमारे जीवन में परिवर्तन हो। क्रोध कम हो। खाना खाते समय, पढ़ते समय टीवी मोबाइल का प्रयोग न हो। वह शक्ति हमारे अध्ययन में पढ़ाई में काम आ सकती है। समिति की तरफ से प्राचार्या को अणुव्रत पटका व स्मृति चिन्ह से समानित किया गया।
इस अवसर पर अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल, मंत्री दर्शन लाल शर्मा, विनोद जैन, सतपाल शर्मा, इंद्रेश पांडे, सुनील मित्तल, जयभगवान लाडवाल, नितिन कुमार अग्रवाल, स्कूल के अध्यापक सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे

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