
एंटिक ट्रुथ | हिसार
एम आई एस पोर्टल पंजीकृत प्राइवेट स्कूल संघ के अध्यक्ष अनिल शर्मा सातरोडिय़ा ने प्राइवेट स्कूलों की मांग उठाते हुए कहा है कि हरियाणा में 700 से अधिक ऐसे स्कूल हैं जो पिछले 15 सालों से शिक्षा निदेशालय पंचकूला, हरियाणा द्वारा दिए गए स्कूल कोड, एम आई एस पोर्टल पंजीकृत एवं शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी किए गए यू डाइस कोड के साथ कार्य करते हुए लगभग 90 हजार गरीब बच्चों को बहुत ही कम फीस में अच्छी शिक्षा देने का काम कर रहे हैं। इसके साथ साथ लगभग 1130 स्कूल अस्थाई मान्यता प्राप्त एवं एग्जिसटिंग सूचिबद्ध स्कूल भी हैं जो कि पिछले 20 साल से भी अधिक समय से स्कूलों में पंजीकृत हजारों बच्चों को शिक्षा देने का काम कर रहे हैं।
अनिल शर्मा ने बताया कि इन सभी स्कूलों का एम आई एस पोर्टल शिक्षा निदेशालय पंचकूला हरियाणा द्वारा बंद कर दिया गया है जबकि इन सभी स्कूलों द्वारा आरटीई के तहत स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए शपथपत्र भी जमा करवा दिया गया था।
अनिल शर्मा सातरोडिय़ा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री हरियाणा को बताना चाहा कि उपरोक्त श्रेणी के सभी स्कूल शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी किए गए यू डाइस पोर्टल पर आज भी सुचारू रूप से कार्यरत हैं और स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों से संबंधित, सभी कार्य पूरे करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा ही निर्देश दिए जाते हैं। इसलिए वे इन सभी प्राइवेट स्कूलों की तरफ से प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री हरियाणा से हमारा सवाल है कि एक ही श्रेणी के सभी स्कूल कहीं पर वैध और कहीं अवैध कैसे हो सकते हैं। ये सरकार का भेदभावपूर्ण रवैया है।
सरकार की तरफ से अधिकारियों को तुरंत आदेश देने चाहिए कि इन स्कूलों के एम आई एस पोर्टल को तुरंत प्रभाव से खोला जाए ।
सातरोडिय़ा ने मुख्यमंत्री महोदय से निवेदन करते हुए कहा कि जब सरकार हरियाणा में लाखों कच्चे कर्मचारियों को दो से पांच वर्ष अनुभव के आधार पर रोजगार की गारंटी दे सकती है तो फिर सरकार इन स्कूल संचालकों द्वारा पिछले 15 से 20 सालों से चला रहे स्कूलों के अनुभव की अनदेखी क्यों कर रही है? उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री इन स्कूलों को भी नियमों में ढिलाई देते हुए हरियाणा भर में चल रहे एम आई एस पोर्टल पंजीकृत एवं यू डाइस कोड के साथ-साथ प्रदेश में शिक्षा को बढ़ावा दे रहे हजारों अस्थाई मान्यता प्राप्त, एग्जिस्टिंग सूचिबद्ध स्कूलों को भी स्थायीत्व देने का काम करें ताकि इन स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।



