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राजरानी गुप्ता के नेत्रदान से दो लोगों का जीवन हुआ रोशन, नेत्र दान कर समाज के समक्ष पेश की मिसाल

अणुव्रत समिति के जीते जी रक्तदान, मरणोपरांत अंगदान, नेत्रदान के अभियान से प्रेरित होकर किए नेत्रदान

एंटिक ट्रुथ | हिसार

एक ओर जहां आज समाज में दूसरों की दु:ख तकलीफें देखकर लोग मुंह फेर लेते हैं। वहीं जीवित रहते समाज सेवा के बाद मरणोपरांत भी कुछ लोग अपने अंगों का दान देकर किसी को नया जीवन प्रदान करते हैं। इसी तरह की मिसाल हिसार शहर के विनोद नगर, मिल गेट गली नं. 3 निवासी गुप्ता परिवार ने पेश की है। इस परिवार में स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने अपनी आंखें दान की जिससे उनकी मृत्यु के बाद दो लोगों के जीवन में रोशनी आ पाई और वे आज इस दुनिया को देख पा रहे हैं। उन्हीं के दिखाए रास्ते पर चलते हुए अणुव्रत समिति के अभियान ‘जीते जी रक्तदान, मरणोपरांत अंगदान, नेत्रदान’ से प्रेरित होकर उनकी धर्मपत्नी राज रानी ने भी अपनी आंखें दान की पिछले दिनों उनका निधन हो गया। अब उनकी आंखें दो लोगों के अंधेरे जीवन में रोशनी कर रही हैं। राजरानी गुप्ता का मानना था कि यह शरीर नाश्वान है और मरने के बाद किसी काम नहीं आता यदि मरने के बाद हमारे शरीर के अंग किसी के काम आ जाएं तो इससे पुण्य का कार्य और कोई नहीं हो सकता। पेशे से अध्यापिका राजरानी गुप्ता व उनका परिवार सामाजिक कार्यों में भी सदैव अग्रणी रहता है। राजरानी गुप्ता ने 1975 में जरूरतमंद बच्चों के लिए इस क्षेत्र में स्कूल खोला था और उन्होंने कई वर्षों तक नाममात्र की फीस पर बच्चों को पढ़ाया। अन्य सामाजिक कार्यों में भी गुप्ता परिवार अग्रणी रहता है। उनके पुत्र सुनील कुमार ने भी अपने अंग दान करने की घोषणा की है।
अणुव्रत समिति के प्रधान राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि राजरानी गुप्ता व उनके पुत्र सुनील कुमार ने अणुव्रत समिति के अंगदान, नेत्रदान अभियान से प्रेरित होकर अपने अंग दान करने का फैसला लिया है जो कि सराहनीय कदम और समाज के लिए प्रेरणा व मिसाल है। उन्होंने अणुव्रत के उद्देश्य व संकल्पों को समाज में एक नई क्रांति लाने का माध्यम बताया।

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