हरियाणाधर्म कर्म

विख्यात ज्योतिषाचार्य अनिल वत्स ने किया श्री सिद्ध महामृत्युंजय अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र का दौरा, विश्व के सबसे बड़े महामृत्युंजय यंत्र के दर्शन किए

महामृत्युंजय संस्थान के साथ मिलकर करेंगे ज्योतिष का प्रचार-प्रसार : अनिल वत्स

एंटिक ट्रुथ | हिसार

ज्योतिष जगत की जानी-मानी हस्ती एवं विख्यात ज्योतिषाचार्य अनिल वत्स मैयड़ स्थित श्री सिद्ध महामृत्युंजय अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष अनुसंधान केंद्र में अपनी धर्मपत्नी के साथ पहुंचे और पावन श्रावण मास में संस्थान में स्थित नर्मदेश्वर शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया। इसके साथ ही उन्होंने संस्थान के पास स्थित विश्व के सबसे बड़े महामृत्युंजय यंत्र का अवलोकन किया और इस यंत्र की स्थापना के लिए स्वामी सहजानंद सरस्वती को बधाई दी व प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह महामृत्युंजय यंत्र अद्भुत है और सकारात्मक ऊर्जा का भंडार है। जिस प्रकार मिश्र के पिरामिड के नीचे कई-कई वर्षों तक वस्तुएं सुरक्षित रहती हैं। उससे भी कहीं शक्तिशाली और जीवंत ऊर्जा का भंडार यह महामृत्युंजय यंत्र है यदि कोई इसके नीचे बैठ कर ध्यान करे तो उसके दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का नाश हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी को एक बार इस यंत्र के दर्शन करने और इसकी ऊर्जा का लाभ लेने के लिए यहां जरूर आना चाहिए क्योंकि यहां पर भगवान शिव की साक्षात कृपा बरसती है। नर्मदेश्वर शिवलिंग पर जलाभिषेक और हवन का सौभाग्य मिलता है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली समझते हैं जो उन्हें यहां आने का अवसर मिला। आश्रम में पहुंचने पर स्वामी सहजानंद सरस्वती व आचार्य कार्तिकेय ने अनिल वत्स व उनकी धर्मपत्नी अनुश्री का फूलों से स्वागत किया।
इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य अनिल वत्स ने कहा कि ज्योतिष एक गणित, विज्ञान है और इसे जन-जन तक पहुंचाया जाना जरूरी है। इसके लिए हम श्री सिद्ध महामृत्युंजय अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के साथ मिलकर ज्योतिष के प्रचार-प्रसार का कार्य करेंगे और इसे सिखाएंगे। स्वामी सहजानंद के साथ मिलकर ज्योतिष को पाठ्यक्रम में शामिल करने और इसे पूरे भारत में व्यापक स्तर पर फैलाने के लिए पूर्ण प्रयास किए जाएंगे। ज्योतिष एक ऐसा विज्ञान है जो मनुष्य की दशा और दिशा बताने में सक्षम है और गृह, नक्षत्रों का पूर्ण ज्ञान इसमें शामिल हैं। अनिल वत्स ज्योतिष के क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं, जिन्हें ज्योतिष के क्षेत्र में उच्च सम्मान प्राप्त है और वे अपने गहन ज्ञान के लिए पूरे देश में विख्यात हैं। आज वे इस क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं और उन्हें ज्योतिष के क्षेत्र में पितामह की उपाधि से जाना जाता है। वे कई दशकों से ज्योतिष के क्षेत्र में हैं और उन्हें इसकी गहरी समझ और ज्ञान है तथा महारत हासिल है।
स्वामी सहजानंद सरस्वती ने ज्योतिषाचार्य अनिल वत्स को विश्वास दिलाया कि ज्योतिष के प्रचार-प्रसार के अभियान में वे पूर्ण रूप से उनके साथ हैं। ज्योतिष को पाठ्यक्रम में शामिल करवाने के अलावा इसे ऑनलाइन क्लासेज के माध्यम से भी सिखाया जाना चाहिए ताकि हर कोई ज्योतिष को घर बैठे-बैठे आसानी से सीख सके। ज्योतिष को पूरे भारत में फैलाने, इसके प्रचार-प्रसार व जन-जन तक पहुंचाने हेतु योगदान के लिए संस्थान पूर्ण रूप से उनके साथ है।  स्वामी सहजानंद ने ज्योतिषाचार्य अनिल वत्स व उनकी धर्मपत्नी आश्रम में पहुंचने पर धन्यवाद व्यक्त किया।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button