
बासड़ा सब माइनर नंबर-2 के पुनर्वास की लंबे समय से चली आ रही मांग पर प्रक्रिया आगे बढ़ने से बालसमंद क्षेत्र के किसानों में खुशी है। इसी सिलसिले में गांव बालसमंद के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भिवानी में सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट किया तथा मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर करते हुए उनका आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।
गांव बालसमंद के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बासड़ा सब माइनर नंबर-2 का पुनर्वास क्षेत्र के किसानों की लंबे समय से प्रमुख मांग रही है। माइनर से जुड़े किसानों, विशेषकर टेल क्षेत्र तक पर्याप्त नहरी पानी पहुंचाने की समस्या को लेकर लगातार सरकार और सिंचाई विभाग के समक्ष आवाज उठाई जाती रही है। किसानों को उम्मीद है कि पुनर्वास कार्य पूरा होने से माइनर में पानी के प्रवाह एवं वितरण व्यवस्था में सुधार होगा और अंतिम छोर तक सिंचाई पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह केवल एक माइनर के पुनर्वास का मामला नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र के किसानों की सिंचाई व्यवस्था और खेती सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। किसानों की प्रमुख मांग है कि उपलब्ध नहरी पानी का लाभ हेड से लेकर टेल तक पहुंचे और अंतिम छोर पर बैठे किसानों को भी उनके हिस्से का पर्याप्त पानी मिले।
3 जून को चंडीगढ़ में मंत्री के सामने रखी थी मांग
किसान नेता कुरड़ा राम नंबरदार एवं बालसमंद क्षेत्र के किसानों ने 3 जून को चंडीगढ़ में सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी के साथ हुई बैठक में बासड़ा सब माइनर नंबर-2 के पुनर्वास सहित बालसमंद क्षेत्र की सात प्रमुख नहरी मांगें रखी थीं। बैठक में किसानों ने क्षेत्र में नहरी पानी की स्थिति और टेल तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने की समस्या से मंत्री को विस्तार से अवगत कराया था। इसके बाद विभागीय स्तर पर इन मांगों को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ी। बासड़ा सब माइनर नंबर-2 के पुनर्वास के लिए करीब 8 करोड़ 52 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र के किसानों में उम्मीद जगी। अब इसकी निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ने पर गांव बालसमंद के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से मिलकर उनका धन्यवाद किया और कार्य जल्द शुरू करवाने का आग्रह किया।
मिठाई खिलाकर जताई खुशी, पुष्पगुच्छ भेंट कर किया धन्यवाद
भिवानी में हुई मुलाकात के दौरान गांव बालसमंद के प्रतिनिधिमंडल ने सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी को पुष्पगुच्छ भेंट किया और मिठाई खिलाकर बासड़ा सब माइनर नंबर-2 के पुनर्वास की दिशा में हुई प्रगति की खुशी साझा की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि किसानों की वर्षों पुरानी मांग पर कार्रवाई आगे बढ़ना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। प्रशासनिक स्वीकृति के बाद अब किसानों की नजर निविदा प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण कार्य शुरू होने पर है। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से आग्रह किया कि निविदा संबंधी शेष प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करवाकर पुनर्वास कार्य धरातल पर शुरू कराया जाए, ताकि किसानों को जल्द इसका लाभ मिल सके। इसके साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों पर विशेष ध्यान रखने की मांग भी की गई। किसानों ने कहा कि परियोजना की वास्तविक सफलता तभी होगी जब पुनर्वास के बाद हेड से लेकर टेल तक पर्याप्त नहरी पानी पहुंचे। इसलिए निर्माण कार्य के साथ-साथ माइनर की क्षमता एवं पानी के सुचारू वितरण को सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
क्षेत्र की अन्य नहरी मांगों पर भी लगातार प्रयास : पारस लौरा
इस दौरान पारस लौरा ने कहा कि बासड़ा सब माइनर नंबर-2 के पुनर्वास के साथ-साथ क्षेत्र की अन्य महत्वपूर्ण नहरी समस्याओं और मांगों को भी सरकार तथा सिंचाई विभाग के समक्ष लगातार मजबूती से रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इनमें किशनगढ़ ब्रांच को बालसमंद क्षेत्र से जोड़ने, सीसवाला हेड पर पर्याप्त नहरी पानी उपलब्ध करवाने, बरवाला ब्रांच की आरडी 52000 से टेल तक रीमॉडलिंग तथा बालसमंद सब ब्रांच की क्षमता बढ़ाने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।
पारस लौरा ने कहा कि इन सभी मांगों का मुख्य उद्देश्य बालसमंद क्षेत्र के नहरी तंत्र को मजबूत करना तथा टेल तक किसानों को उनके हिस्से का पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाना है। बासड़ा सब माइनर नंबर-2 के पुनर्वास की दिशा में हुई प्रगति से क्षेत्र के किसानों में उम्मीद बढ़ी है और उन्हें आशा है कि बाकी लंबित नहरी मांगों पर भी सरकार एवं सिंचाई विभाग द्वारा कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बालसमंद क्षेत्र कृषि प्रधान है और यहां खेती के लिए नहरी पानी की पर्याप्त उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। नहरों की क्षमता और जल वितरण व्यवस्था बेहतर होने से टेल तक पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी तथा किसानों की भूजल पर निर्भरता भी कम हो सकेगी।
टेल तक पानी पहुंचना ही पुनर्वास का मुख्य उद्देश्य
गांव बालसमंद के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बासड़ा सब माइनर नंबर-2 के पुनर्वास का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब पानी अंतिम छोर के खेतों तक पहुंचे। माइनर का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप होना चाहिए और कार्य के दौरान गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि क्षेत्र के किसान चाहते हैं कि स्वीकृत परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो। निर्माण शुरू होने के बाद भी किसान कार्य की प्रगति और गुणवत्ता पर नजर रखेंगे तथा किसी तकनीकी या जमीनी समस्या को संबंधित विभागीय अधिकारियों के सामने रखा जाएगा। किसानों ने कहा कि उनका उद्देश्य क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था का स्थायी सुधार और प्रत्येक पात्र किसान तक उसके हिस्से का नहरी पानी की अन्य लंबित मांगों पर भी कार्रवाई की उम्मीद
गांव बालसमंद के प्रतिनिधिमंडल ने सिंचाई मंत्री से आग्रह किया कि जिस प्रकार बासड़ा सब माइनर नंबर-2 के पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है, उसी प्रकार क्षेत्र की अन्य लंबित नहरी मांगों पर भी प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि किशनगढ़ ब्रांच, सीसवाला हेड, बरवाला ब्रांच और बालसमंद सब ब्रांच से संबंधित मांगों पर विभागीय एवं तकनीकी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि पूरे बालसमंद क्षेत्र की नहरी व्यवस्था में दीर्घकालीन सुधार हो सके।
प्रतिनिधिमंडल में ये किसान रहे शामिल
सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी से मिलने पहुंचे गांव बालसमंद के प्रतिनिधिमंडल में पारस लौरा, अमरसिंह लौरा, सुनील बिजला, राजकुमार लौरा, भरत सिंह, छोटू लौरा, रमेश कुमार, सुशील श्योराण और कृष्ण कुमार सहित अन्य किसान शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मंत्री को मिठाई खिलाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि बासड़ा सब माइनर नंबर-2 की निविदा प्रक्रिया शीघ्र पूरी होने के बाद पुनर्वास कार्य धरातल पर शुरू होगा और इसका लाभ क्षेत्र के किसानों को मिलेगा। गांव बालसमंद के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नहरी तंत्र को मजबूत करवाने, टेल तक पर्याप्त पानी पहुंचाने और क्षेत्र की लंबित सिंचाई समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए किसानों के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।



