गुरु तेग बहादुर का जीवन हमें सच्चाई, न्याय और धर्म के सिद्धांतों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है
गुरु तेग बहादुर साहिब के शहीदी दिवस पर गुरुद्वारा साहिब गोबिंद नगर में हुआ शहीदी समागन

एंटिक ट्रुथ | हिसार
गुरुद्वारा साहिब गोबिंद नगर डाबड़ा चौक में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के शहीदी दिवस पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृत साहिब द्वारा शहीदी समागम का आयोजन किया गया। गुरुद्वारा के प्रधान सरदार मुख्तयार सिंह ने बताया कि समागम से पूर्व गत दिवस शहर में नगर कीर्तन निकाला गया। शहीदी समागम में प्रसिद्ध रागी जत्थों व विद्वानों भाई गुरदित्त सिंह हजूरी रागी जत्था श्री दरबार साहिब, भाई नवजोत सिंह अरलीभंन प्रचारक, धर्म प्रचार कमेटी एचजीपीसी, भाई रघुबीर सिंह ढाडी जत्था धर्म प्रचार कमेटी, भाई मनवीत सिंह नाभा प्रचारक धर्म प्रचार कमेटी द्वारा गुरु की महिमा का गुणगान किया गया। कार्यक्रम में रागी जत्थे ने अपने शब्दों में बताया कि गुरु तेग बहादुर जी सिख धर्म के नौवें गुरु थे, जिनका जन्म अमृतसर में हुआ था। उनके पिता गुरु हरगोबिंद जी थे, जो सिख धर्म के छठे गुरु थे। उन्होंने सिख धर्म के सिद्धांतों के साथ-साथ युद्ध कला और घुड़सवारी भी सीखी। गुरु हरकिशन जी की मृत्यु के बाद, गुरु तेग बहादुर जी को सिख धर्म के नौवें गुरु के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने गुरु पद के दौरान सिख धर्म के सिद्धांतों को फैलाने और सिख समुदाय को मजबूत बनाने के लिए काम किया। गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। गुरु तेग बहादुर के पास कश्मीरी पंडितों ने आकर मदद मांगी थी कि उन्हें धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है इसलिए वे उनकी रक्षा करें। जिस पर गुरु तेग बहादुर ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए शीशगंज में बलिदान दिया था।

गुरु तेग बहादुर जी ने नाम जपने को बहुत महत्व दिया और कहा कि नाम जपने से ही मनुष्य को सच्ची शांति मिलती है। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा करना हर मनुष्य का कर्तव्य है। उन्होंने सच्चे नाम की कमाई को बहुत महत्व दिया और कहा कि सच्चे नाम की कमाई से ही मनुष्य को सच्ची शांति मिलती है। रागी जत्था ने कहा कि सिख धर्म का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को सच्चे नाम की कमाई और सच्चे जीवन के सिद्धांतों का पालन करने के लिए प्रेरित करना है। गुरु तेग बहादुर जी की जीवनी एक प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें सच्चाई, न्याय और धर्म के सिद्धांतों का पालन करने के लिए प्रेरित करती है।
शहीदी समागम में अमरजीतकौर बाड़ा मैंबर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मुख्य रूप से उपस्थित हुईं। वहीं गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी एवं मैंबर और काफी संख्या में साध संगत उपस्थित रही। इस दौरान गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।



