ट्रंप का जलवायु समझौते से पीछे हटना ‘बहुत जल्दबाजी’ भरा कदम : सहजानंद

एंटिक ट्रुथ | हिसार
वल्र्ड क्लाइमेट चेंज फाउंडेशन के ब्रांड एंबेसडर एवं पर्यावरण मुद्दे पर जागरूकता अभियान चलाने वाले स्वामी सहजानंद ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के हटने पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के फैसले पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने अमेरिकी सरकार से इस फैसले पर पुर्नविचार करने का आग्रह किया है। स्वामी सहजानंद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के प्रति वैश्विक प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए 2015 में 196 देशों ने पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में सदी के अंत तक वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे या पूर्व-औद्योगिक स्तरों से ‘2 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे’ सीमित करने की रूपरेखा तय की गई थी।
इस ऐतिहासिक माने जाने वाले पेरिस समझौते से अमेरिका के दूसरी बार हटने से जलवायु परिवर्तन को रोकने के वैश्विक प्रयास कमजोर पड़ेंगे, जिसके बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल उत्सर्जन में भारी कटौती के माध्यम से ही संभव है। स्वामी सहजानंद ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पेट्रो पदार्थों से चलने वाली वाहन कम्पनियों को प्रोत्साहित कर इलेक्ट्रिक वाहनों की सब्सिडी खत्म करने के फैसले पर भी हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि पेट्रो पदार्थों के अंधाधुंध इस्तेमाल से वातावरण में हानिकारक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हुआ है। अमेरिका, जो स्वयं चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देश है, उसकी सरकार ही हानिकारक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन रोकने के गंभीर प्रयास नहीं करेगी तो फिर पृथ्वी के प्राकृतिक विनाश की घटनाएं तेजी से बढ़ेगी। प्रकृति के विरुद्ध जाना विनाश को निमंत्रण देना है। इसका ताजा उदाहरण अमेरिका का ही समृद्ध शहर लांस एंजल्स है, जिसमें भडक़ी आग ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया था। बेकाबू आग को नियंत्रित करने के लिए सब असहाय थे।
ट्रंप ने इससे एक दिन पहले ही एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के पट्टे की बिक्री, उनके अनुमोदन, परमिट और ऋण जारी करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला भी वातावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला है।
पेट्रो वाहनों के यह हैं आंकड़े
इस समय पूरी दुनिया में लगभग 1.644 बिलियन चार पहिया पेट्रो वाहन हैं। इनमें से लगभग 17 प्रतिशत वाहन अकेले अमेरिका में हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में पूरी दुनिया में अकेले कारों की संख्या 1.446 बिलियन के आसपास पहुंच चुकी है जबकि पूरी दुनिया में आबादी की संख्या लगभग 8 बिलियन के आसपास है। यानि पूरी दुनिया में इंसानों की संख्या के मुकाबले लगभग 19 प्रतिशत कारें हैं। पूरी दुनिया में लगभग हर चौथे इंसान के पास एक कार हैं। वर्णनीय है कि 1 बिलियन, 100 करोड़ के बराबर होता है तो 1.446 बिलियन का मतलब 144.6 करोड़ यानि भारत की आबादी (लगभग 140 करोड़) से भी ज्यादा कारें पृथ्वी पर दौड़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑफ क्लाइमेट चेंज) के अनुसार, इस सदी में जलवायु परिवर्तन के तीव्र नकारात्मक प्रभावों को रोकने हेतु राष्ट्रों को वायुमंडल से 100 बिलियन से 1 ट्रिलियन टन के बीच कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण से बाहर निकालने की आवश्यकता है। अमेरिका के ताजा फैसले से वायुमंडल में ग्रीन उत्सर्जन कम करने के साथ ही जहरीले रसायन छोडने वाले विशेषकर पेट्रो पदार्थ से चलने वाले वाहन उद्योगों पर अंकुश लगाने की योजना को गहरा धक्का लगा है।
उल्लेखनीय है कि स्वामी सहजानंद मिशन ग्रीन फाउंडेशन के संचालन के साथ करीब 8 सालों से वे पर्यावरण युक्त और पॉलिथिन मुक्त धरा के संकल्प के साथ नई पीढ़ी को प्रदूषण के विष से बचाने के लिए पिछले 24 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ में विश्व के सबसे बड़े महामृत्युंजय यंत्र की स्थापना कराई है। इसके साथ ही वे महाकुंभ में आने वाले लोगों के बीच पर्यावरण युक्त-पॉलीथिन मुक्त बनाने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं।



